गिलोय: चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि, जाने गिलोय की कहानी, 5 महत्व, गिलोय के फायदे Giloy Benefits

गिलोय के फायदे

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पिछले लगभग डेढ़ सालो से हम सभी लोग वायरस जनित समस्या कोरोना से जूझ रहे है। प्रत्येक घर मे बहुत कम ही ऐसे सदस्य होंगे जो कोरोना से बच पाए होंगे ज्यादातर के शरीर यह वायरस घुसा भी और बिना कोई नुकसान किये निकल भी गया सिर्फ मामूली से लक्षण जैसे- हल्का बुखार,पेट खराब और अपच ही सामान्य लक्षण ही दिखाई दिए।

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अधिकतर लोगों ने घरेलू इलाज को प्राथमिकता दी वही कुछ लोगो ने अस्पताल का रुख भी किया। घरेलू इलाज में लोगों द्वारा किये गए उपचारो में गर्म पानी,काढ़ा आवला जूस,एलोवेरा,हल्दी,अदरक,गिलोय इत्यादि शामिल है।

जी हाँ गिलोय जो आयुर्वेद में सबसे गुणकारी औषधि मानी जाती है। आज हम अपने रीडर्स को इसी गुणकारी औषधि के , गिलोय के फायदे बारे में विस्तार से बता रहे है।

पौराणिक कथाओं में गिलोय का महत्व

Giloy ke Fayde गिलोय के औषधीय गुण गिलोय के नुकसान
गिलोय के फायदे

आजकल गिलोय का जितना उपयोग बढ़ गया है उतना ही कालांतर में इसका महत्व रहा है। अमृता, अमृतवल्ली, टिनोस्पोरा, कार्डिफोलिया, गुडूची, वत्सादिनी, गुलवेल, अमृतबेल, मधुपर्णी इत्यादि  अलग-अलग प्रदेशो में इसे अनेको नाम से जाना जाता है।

पौराणिक कथाओं में इसका मुख्य रूप से वर्णन है। कहा जाता है जब दैत्यराज बलि ने अपनी दुष्टता से तीनों लोकों में हाहाकार मचाया हुआ था उस स्थिति में सभी देवता इसका निवारण पाने हेतु भगवान श्री हरि विष्णु जी के पास गए। भगवान श्री हरि विष्णु जी द्वारा देवताओ के कल्याण हेतु समुन्द्र मंथन का उपाय सुझाया गया और उन्होंने कहा की क्षीरसागर के गर्भगृह में अनेक पदार्थो के साथ-साथ अमृत भी छुपा हुआ है जिसका पान करने मात्र से मृत्यु भी पराजित हो जाती है। अर्थात तुम्हे समुन्द्र मंथन करना होगा।

तत्पश्चात सभी देवता श्री हरि विष्णु के सुझाव अनुसार दैत्यराज बलि के सामने संधि के लिए गए और उसके सामने समुद्र मंथन का प्रस्ताव रखा और मना लिया। समुद्र मंथन के लिए भगवान श्री हरि विष्णु जी के अवतार कच्छप की पीठ को माध्यम बना कर उस पर मन्दराचल पर्वत को स्थापित किया गया और वासुकि नाग को रस्सी बनाया गया और पूरे वेग के साथ मंथन करने लगे। मंथन से हलाहल विष के साथ-साथ अंत मे अमृत से भरे कलश की प्राप्ति हुई। जिसे पाने की इच्छा में देवता और दानवों में होड़ मच गई दोनो ही पक्ष अमृत कलश लेकर यहां वहां भागने लगे। इसी छीना-झपटी में अमृत कलश की बूंदे छलक कर पृथ्वी पर जहां-जहा गिरी वहां-वहां अमृता बेल (गिलोय) उतपन्न हो गयी। यही कारण है कि आज भी गिलोय में औषधीय गुण मौजूद है। और यह अनेक रोगों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है।

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गिलोय के फायदे , Giloy Benefits, गिलोय खाने का तरीका

गिलोय विभिन रोगों के उपचार में उपयोग होने वाली अत्यंत गुणकारी औषधि है। जिसके अनेक लाभ है जिनमे से कुछ के बारे आपको बता रहे है।

  • गिलोय को पीलिया रोग के लिए अत्यन्त लाभकारी माना जाता है। इसकी पत्तियों को सीधे ही पानी मे उबालकर व जूस बना कर 100-150 ml मात्रा में लिया जा सकता है। या आप इसकी पत्तियों को पीसकर (एक चम्मच) बराबर शहद के साथ भी उपयोग कर सकते है।
  • जो लोग स्किन एलर्जी व हाथ पैर में जलन की समस्या से परेशान है। उनके लिए यह औषधि बहुत लाभकारी है। गिलोय की पत्तियों को पीसकर एक पेस्ट तैयार कर ले इसे एलर्जी के स्थान व हाथ पैरों की जलन के स्थान पर कुछ समय तक लगाए लाभ होगा।
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  • पेट से जुड़ी बीमारियों में भी गिलोय अत्यंत फायदेमंद है जिन्हें कब्ज,गैस व अपचन की समस्या है वह इसकी एक उंगली बराबर टहनी को पीस कर 500 ml पानी मे मिलाये जब पानी 200ml रह जाये तो तैयार है पीने के लिए यह त्रिदोष नाशक(वात पित कफ) को बैलेंस करती है।
  • गिलोय अनीमिया यानी खून की कमी को भी दूर करने भी कारगर है इसको घी या शहद के साथ मिलकर लेने से खून की कमी नही होती।
  • इसका इस्तेमाल इम्यून बूस्टर(रोग प्रति रोधक क्षमता) को बढ़ाने व बुखार ,सर्दी दूर करने के लिए भी किया जाता है। इसकी पत्तियों या इसकी डंठल (टहनी) को पीस कर पानी मे उबालकर पीने से कुछ दिनों में ही लाभ हो जाता है।

आप सब भी गिलोय का प्रयोग, गिलोय के फायदे अपने दैनिक जीवन मे कीजिये और अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करे और अन्य लोगो को भी बताऐ।

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नोट :- इसकी मात्रा ऊपर बताई गई है उतनी ही मात्रा में प्रयोग कीजिये इससे ज्यादा नही वेसे तो इसका कोई दुष्प्रभाव नही है। यदि आपके शरीर मे इसका दुष्प्रभाव दिखे तो इसे इस्तेमाल न करे।

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1 Response

  1. चंचल says:

    बहुत बढ़िया जानकारी

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